राहुल गांधी बना भगौड़ा : नेता प्रतिपक्ष के पद का अपमान

हमारे देश के राजनीतिक इतिहास मैं जब भी किसी भगोड़े नेताजी बात लिखी जाएगी तो उसमें सर्वप्रथम नाम होगा
राहुल राजीव गांधी का…..!
जो व्यक्ति जनता के मुद्दे पर चुनाव छोड़कर भाग जाता हो,
देश के नई खिलाफ साजिशों के लिए विदेश भाग जाता हो,
संसद मैं देशहित के मुद्दे पर चर्चा से बचने के लिए भाग जाता हो,
देश के गृहमंत्री के जवाब सुनने के समय संसद से भाग जाता हो,
उसे अगर भगोड़ा ना कहे तो क्या ही कहे बल्कि देश का सबसे बड़ा भगोड़ा घोषित कर देना उचित होगा,
देश के मानसून सत्र को पूरे देश के विपक्ष द्वारा पानी फेर दिया गया पूरे सत्र मांग करते रहे कि चर्चा सरकार करना चाहिए जिसके बाद सरकार खुद आगे रहकर आई, सरकार ने साफ कहा कि आप संसद मैं बैठिये हम हर विषय पर चर्चा करेंगे,
छात्र आन्दोलन की बात होगी, छात्रों पर लाठी चलवाई उसकी भी बात होगी,
लेकिन देश का दुर्भाग्य है कि देश के लोकसभा का नेता सबसे गैर जिम्मेदार,फूहड़, अपरिपक्व और जुबान से टुच्ची भाषा बोलने वाला व्यक्ति है,
वैसे इसमें इसकी भी गलती नहीं है जिसके पूरे परिवार ने देश को अपना गुलाम समझा हो,देश को अपने बाप की संपत्ति समझा हो,देश में तानाशाही दिखाई हो वो आज एक एक चुनाव जीतने के लिए तरस रहे हो तो ऐसी ओछी भाषा मुंह से निकल ही जाती है ऊपर से परिवार मैं संस्कार नाम का चीज होना भी जरूरी है,
आज सोने का चम्मच लेके जन्मे लोग गली गली पैदल पैदल घूमने को मजबूर हो गए हो,जनता को विश्वास दिलाने के लिए दिन रात चीख रहे हो कि हम देश का भला करना चाहते हो ओर फिर भी जनता को विश्वास ना हो रहा हो तो दिमागी तौर पर बावला पन आ जाता है जो आज राहुल गांधी की भाषा में साफ नजर आया,
आज देश के गृहमंत्री अमित शाह जी ने मीडिया के सामने कहा कि विपक्ष ओर खासकर राहुल गांधी लोकसभा मैं 3 बजे का नोटिस दे दे कल तक पूरी चर्चा होगी फिर मैं जवाब दूंगा,
बदले मैं बिगड़ैल स्वभाव वाले घमंडी सोच वाले युवराज ने कहा कि मुझे अमित शाह जी के भाषण सुनने मैं कोई दिलचस्पी नहीं है,
अब इस मूर्ख की कौन समझाए कि अमित शाह भारत देश की 140 करोड़ जनता के गृहमंत्री है जिनका भाषण ओर संवाद 140 करोड़ जनता सुनने के लिए तैयार है लेकिन क्या करे गांधी नेहरू परिवार ने जनता को पहले नहीं अपने आप को हमेशा देश की जनता से पहले माना है,
इसलिए उस घमंड मैं चूर होके यह बात कही,
सच्चाई पता क्या है कि राहुल गांधी को डर है कि अगर अमित शाह बोलने पर आए तो दिल्ली के साथ साथ झारखंड पर भी बोलेंगे जिसकी वजह से कांग्रेस ओर राहुल गांधी की पूरी काली सोच ओर मानसिकता देश के सामने उजागर हो जाएगी और देश जान जाएगा कि झारखंड मैं जो नौकरिया बेची है उसका पैसा किसके जेब मैं गया है,
वैसे ये डर लाज़मी है क्योंकि चोरी की है तो आप कानून से बच नहीं सकते ओर चोर को हमेशा डर होता है कि छुप जाने से कानून छोड़ देगा लेकिन कानून आज नहीं तो कल धर ही लेगा बचकर कहा जाओगे,
देश के सबसे बड़े भगोड़े के नाम आज का दिन रहा…….!
हमें संसद में अमित शाह का भाषण सुनने में कोई इंटरेस्ट नहीं है – राहुल गांधी
फिर पिछवाड़े का जोर लगाकर क्यों चीख-चीखकर उन्हें बुला रहे थे?
क्या हुआ ?
चम्मचों का डरपोक मालिक,शाह जी संसद में आओ का हल्ला कर रहा था अब जब वो संसद में आए तो कायर पप्पू भाग लिया घाघरा उठाके क्योंकि डर था घाघरा पूरा फाड़ेंगे मोटा भाई।
3 से पहले ही सरेंडर कर दिया
क्योंकि इसको पता है जब हमें शाहजी जवाब देंगे इसके खानदान की कुकर्मों की डायरी खुल जाएगी …. मीडिया से छात्रों से जनता से बोलता है डरना नहीं है और अपनी खुद की पेंट गीली और पीली हो चुकी है
“हमें चर्चा में कोई दिलचस्पी नहीं है”
ये डेढ़ स्याणा हर दिन गोल पोस्ट चेंज कर रहा
अब जब गृह मंत्री अमित शाह जवाब देने जा रहे हैं, तो अब इसकी फट कर चौहत्तर हो गयी है
इसी वजह से इसे ‘भगोड़ा’ कहा जाता है।
वह तो तैयार है बाँस डालने को बस तुम ही डरे हुए हो।
कायर की तरह भागना हमेशा तुम्हारी आदत है।
अगर तुममें हिम्मत है तो ध्यान खींचने के लिए मीडिया बाइट्स देने के बजाय.. पार्लियामेंट के अंदर जाओ और उससे बहस करो…देश देखेगा कि किसमें हिम्मत है और कौन डरा हुआ है।
“अमित शाह ये बता दें गोली किसने चलाई किसने शूट आउट का आर्डर दिया”
क्यों तेरे घर आएंगे तेरे कान में फूकने जलेबी के बावर्ची
वंदे मातरम
क्या आज से राहुल गांधी को राहुल भगौड़ा कहकर पुकारा जाना चाहिये? कमेंट में अपनी राय अवश्य दें…