राजीव, संजय और आदिल – क्या आप जानते हैं इन्हें?
इंदिरा गांधी की कितनी संतानें थी? अधिकांश लोग कहेंगे – 2 ; इनमें से एक ही अपने वैवाहिक पति से थी, दूसरी किसी और से – और एक तीसरी भी थी – कौन किससे ? इसकी बड़ी रहस्यमयी मनोहर कहानी है ये !
इन्दिरा बेगम का यह इतिहास कितने लोग जानते हैं
जो नहीं जानते हैं, उनको मुहम्मद युनुस की पुस्तक पढ़ना चाहिये, और यूट्यूब/ गूगल पर सर्च करना चाहिये !
मुहम्मद यूनुस-इंदिरा गांधी उर्फ़ मेमुना बेगम का दूसरा अघोषित पति था। वह संजय गाँधी का असली पिता था… यह गुप्त निकाह था !
_उसी यूनुस ने संजय की मेनका के साथ शादी के समय ससुर का रोल किया था और अड़ गया था कि बारात मेरे घर से निकलेगी…_
जब संजय को यह बात पता चली कि उसका बाप कौन है, तो उसको इन्दिरा से नफरत हो गई और उसने इंदिरा के गाल पर छः थप्पड़ जड़ कर कांग्रेस का चुनाव चिह्न उसके गाल पर बना दिया…
इसी कारण संजय को सफदरजंग एयरपोर्ट पर एक छोटा सा प्लेन क्रैश करवा कर मरवा दिया गया… यही मुहम्मद यूनुस था जो संजय गाँधी की लाश पर छाती पीटकर रो रहा था !
मुहम्मद यूनुस वही है जिसने अपनी पुस्तक Persons, Passions and Politics में लिखा है कि मैं संजय गाँधी का बाप हूँ और मैंने उसका खतना करवाया था…
उसी मुहम्मद युनुस का एक बेटा और था आदिल शहरयार…. यानी इन्दिरा का तीसरा बेटा जो अमेरिका में ड्रग्स और हथियार की तस्करी के आरोप में 35 वर्ष की सजा पाकर जेल में बंद था… उसी आदिल शहरयार को इंदिरा के वध के बाद राजीव गाँधी की सरकार ने अमेरिकी राष्ट्रपति से क्षमादान दिलाने का प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली… रोनाल्ड रीगन ने क्षमादान नहीं दिया !
_इसी बीच भोपाल गैस कांड हो गया…. एंडरसन भोपाल आया तो उसे अर्जुन सिंह ने कैद करवा लिया… राजीव गाँधी ने अपने भाई आदिल शहरयार के बदले एंडरसन को छोड़ने का अमेरिका से सौदा किया…_
सनातनियों की लाशों का सौदा किया गया…. इस नीच जेहादी छद्म मियाँ नेहरू खानदान ने अपने तीसरे भाई आदिल शहरयार को अमेरिका से छुड़वा लिया और एंडरसन को भगा दिया….!
_इस घटना को सुषमा स्वराज ने संसद में आदिल शहरयार के बारे में बहस की चुनौती रखकर खान्ग्रेसियों की बोलती बंद कर दी थी… जब वे उन पर ललित मोदी को भगाने का आरोप लगा रहे थे.. यूट्यूब पर वह वीडियो उपलब्ध है !_
अब आप समझ सकते हैं कि राहुल गांँधी क्यों बोल गये कि कांग्रेस मुस्लिम पार्टी है…
क्या इस पार्टी से सनातन धर्म को बचाने की कल्पना की जा सकती?
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