तमिलनाडु में हिंदुओं से भेदभाव ??

अभी आपने सुना होगा तमिलनाडु के विजय सरकार ने मुस्लिम छात्राओं के ट्यूशन को ग्रेजुएशन तक पूरी तरह से फ्री कर दिया है, जो गवर्नमेंट से लेकर निजी स्कूलों तक में लागू होगा, लेकिन बात केवल इतनी तक नहीं है
पूरा पढ़ते जाइए आपको समझ आ जायेगा
तमिलनाडु के वक़्फ़ बोर्ड के द्वारा एक से आठ क्लास तक की मुस्लिम लड़कियों को स्कॉलरशिप दी जाती थी, विजय ने इसे बढ़ा कर मैट्रिक तक कर दिया है और रकम भी हर साल दो हजार रुपए दी जाएगी
इसके बाद चेन्नई में एक बहुत बड़ा सरकारी कॉलेज लड़कियों के लिए खोला जाएगा, जो हिंदू लड़कियों को छोड़कर बाकी सभी कम्युनिटी के लिए होगा, इसे अल्पसंख्यकों के नाम पर पुश किया गया है और करोड़ो रुपए फंड के रूप में अलॉट भी कर दिए है
ये तो हो गई एजुकेशन की बात, अब बात करते है रोजगार की
सरकार 10,000 अल्पसंख्यकों के लिए अलग से कौशल विकास की योजनाएं चलाएंगी, इसमें IT, ऑटोमोबाइल, ब्यूटी एंड वेलनेस, कढ़ाई, गारमेंट्स इंडस्ट्री आदि आदि को लेकर सिखाया जाएगा, उन्हें प्रैक्टिकल सिखाया जाएगा
इस योजना में भी हिन्दू बाहर रहेंगे
अब आते है धार्मिक संस्थानों को लेकर, विजय सरकार ने 100 करोड़ रुपए का फंड तैयार किया है जिसका उपयोग अल्पसंख्यकों अर्थात मुस्लिमों और ईसाइयों के धार्मिक स्थानों के विकास के लिए यूज किया जाएगा
मतलब ये बिना ब्याज के लोन देंगे ताकि ये लोग अपने धार्मिक स्थलों का अच्छे से विकास कर सके, लेकिन इसमें प्वाइंट ये है कि इसका उपयोग आमदनी पाने के लिए किया जाएगा जिसका मतलब है कि दुकानों, बाजारों, मॉल, मेरीज हॉल, शिक्षा और ट्रेनिंग सेंटर्स आदि में इस फंड को अलॉट करने की ज्यादा कोशिश होगी
और ये सब में भी हिंदुओं को साइड में रखा जाएगा
वहीं दूसरी तरफ अगर हिंदुओं के मंदिरों को देखे तो राज्य के बंदोबस्ती विभाग की ही रिपोर्ट के अनुसार 12,000 मंदिर पूरी तरह से बंद हो चुके है जहां पूजा नहीं होती, 34,000 मंदिरों के हाल बेहाल है और अपनी इमारतों को रिपेयर करने में भी असमर्थ है
तो वहीं बड़े मंदिरों के दान को सरकार हड़पती है जिसका एक पैसा छोटे मंदिरों के उद्धार पर नहीं जाता ऊपर से उनकी जमीनों को भी बेचती रहती है अलग अलग सरकारें समय समय पर
और सबसे खराब बात ये है कि 87% आबादी हिंदुओं की है
तमिलनाडु में साठ के दशक में जो राजनीति चली है उसका फल वहां के लोगों को अब भुगतना पड़ेगा, भाषा के नाम पर तेलुगु, कन्नड़, हिंदी सबसे झगड़े मोल लिए, अपने ही धर्म को अपमानित किया और जिन्हें जूते पहनाकर कालिख पोत कर नंगे घुमाना था उन्हें महापुरुष की संज्ञा दे दी
अब नाम मैने किसी का लिया नहीं है तो आहत होने की जरूरत नहीं है
जिस भाषा और संस्कृति के नाम पर लड़ने चले थे और जिनके कंधे के सहारे, उन्होंने ही उनके पैरों से उनकी जमीन खींचनी शुरू कर दी है


