जिहाद और आतंक से बचाव में सुअर का प्रयोग

#भारत मे क्यों जरूरी है #jihawg बुलेट का उत्पादन और इस्तेमाल
ये बात 1899 से 1913 के बीच की है जब फिलीपीन्स में मोरो मुस्लिम आतंकियों ने वहां आतंक मचा रखा था। उसका एक संगठन
Moro Islamic Liberation Front वहां इस्लामिक स्टेट चाहता था।
उस समय अमेरिकी ऑफिसर जनरल परसिंग अपने सैनकों के साथ उन आतंकियों का सामना कर रहे थे। उसी समय जनरल परशिंग ने गहन अभियान और युद्ध के बाद 50 खूँखार आतंकियों को अपने गिरफ्त में लिया था ।
आगे की बताने से पहले आपको बता दूं की जिहादी आतंकी गैर मुसलमानों को मारने वक्त मरने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं
क्योंकि उनके के अनुसार इस तरह जान गवांने को जिहाद कहा जाता है और जिहाद करने वाले मुसलमान जन्नत में 72 हूरें पाते हैं।
और वो जिहाद करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं उन्हें इस मौत से डर नहीं लगता
लेकिन उनके मजहब के अनुसार सुअर एक अपवित्र जानवर है और इसलिए ये जिहादी सुअर से डरते हैं।
इसी कारण जनरल परशिंग ने इन 50 पकड़े गए जिहादियों को सबक सिखाने के लिए एक बिल्कुल नया तरीका अपनाया।
दअसल ये जिहादी सुअर के संपर्क में आने से डरते हैं और ये सोचते हैं कि अगर जिहाद करते वक्त सुअर के संपर्क में ये आ गए तो जन्नत नहीं जा पाते सीधा जहन्नुम जाते हैं और 72 खूबसूरत हूरें भी नहीं मिल पाती।
कहने का मतलब ये सुअर से खौफ खाते हैं।
इसलिए जनरल परशिंग ने इन 50 पकड़े गए जिहादियों को सीधा एक लाइन में हाथ पैर बांधकर खड़ा किया गया।
फिर एक सुअर लाया गया और उन जिहादियों के सामने सुअर को काटकर उसके खून में बुलेट भिगोया और फिर उन्हीं सुअर के खून से भीगे गोलियों से 50 में से 49 जिहादियों को भून डाला।
बाकी बचा एक आतंकी को उन्होंने उसे छोड़ दिया और उससे कहा जाओ अपने आका को इस घटना के बारे में बताओ। वो वहां से नौ दो ग्यारह हो गया और उसने इस घटना की जानकारी अपने आका को बतायी।
फिर उसके बाद अगले 50 सालों तक वहां कोई आतंकी हमला नहीं हुआ।
सच्चाई ये है कि यूरोप और अमेरिका में जिहादियों के लिए सुअर वाली बुलेट तैयार की जाती है जिसमे सुअर की चर्बी खून आदि का इस्तेमाल किया जाता है।
इजराइल अमेरिका ब्रिटेन जर्मनी को अच्छी तरह पता है इन्हें की तरह निपटाया जाए।
आपको बता दूं कि भारत मे सन 1857 की क्रांति में मुसलमान इसलिए सामिल हुए थे क्योंकि अंग्रेजों के अंडर काम कर रहे मुस्लिम सैनिकों को ये पता चला था कि कारतूस में सुअर की चर्बी का इस्तमाल किया जा रहा है।
और उन्हें मुँह से खींचकर उसे निकलना पड़ता था।
सुअर का खून या चर्बी के बदले सुअर के मूत्र का भी इस्तेमाल किया जा सकता है!
इसलिए दुनिया भर में फैली जिहादियों की दहशतगर्दी से निपटने के लिए सुअर का उपयोग करना जिहाद और आतंकवाद को समाप्त करने लिए अत्यंत आवश्यक है।

