दिमागी नक्सलियों की पहचान
15 अगस्त 2026 को लालकिले की प्राचीर से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के एक शब्द “दिमागी नक्सली” ने सभी देशद्रोहियों और विपक्षी पक्षियों के दिमाग के फ्यूज उड़ा दिए। इस शब्द को लेकर बहस बाजार गर्मा गया और राजनीतिक पारा हाई हो गया। आइए देखते है कि इस शब्द के पीछे की पृष्ठभूमि और सन्दर्भ ताकि हम सभी इन दिमागी नक्सलियों की पहचान कर सकें।
2009 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि नक्सलवाद सबसे बड़ा Internal Threat है.
फिर 2013 में, कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि माओवादी/नक्सली समाज के विभिन्न वर्गों को लामबंद करने के लिए जनसंगठनों का इस्तेमाल कर रहे थे।
कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार ने कहा था कि इनमें से कुछ संगठन मानवाधिकार NGOs की आड़ में काम करते थे और इनमें विचारधारा से प्रभावित लोग, शिक्षाविद और कार्यकर्ता शामिल थे। UPA के गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने बकायदा documents submit करवाये थे इस बाबत.
यानी, कांग्रेस भी “अर्बन नक्सल” या “दिमागी नक्सल” की अवधारणा से अवगत थी।
आज जब “दिमागी नक्सल” शब्द का इस्तेमाल किया जाता है, तो वही कांग्रेस इस पर नाराज़ हो जाती है। आज कांग्रेस के बड़े बड़े नेता सीना ठोक कर कह रहे हैं… कि हम हैं Urban नक्सल.. हम है दिमागी नक्सल.
कांग्रेस, जो भारत की सबसे पुरानी राजनैतिक पार्टी है… क्या वह अब नक्सलियो का अड्डा बन चुकी है….. और अब कांग्रेस ही भारत के लिए सबसे बड़ा Internal Threat बन चुकी है. आपको क्या लगता है
प्रधानमंत्री ने दिमागी नक्सल की बात की क्या आप जानते है यह दिमाग के साथ चलने वाला एक ऐसा रंजिश है जो गलत,अनैतिक,असंवैधानिक,असंवेदनशील और अराजकता को सही बताने वाला एक वैचारिक दृष्टिकोण है।
ये चीजे विचार आतंकवाद को सही बतायेगा ये नक्सलवाद को सही बतायेगा ये उग्रवाद को सही बतायेगा ये प्रपंच और येन-केन-प्रकारेण तरीके से आपके दिमाग को हाईजैक करेगा। आपको आपराधिक मानसिकता का शिकार बनाकर अपराधी बना देगा और स्वयं को आपसे दुर रखकर जब आप चौतरफा घिर जायेंगे तो आपसे पल्ला छुड़ाकर आपकी निंदा भर्तसना और आलोचना करके सियासत के मुद्दे उपजायेगा।
आपको जातिवाद,क्षेत्रवाद और मजहबी बुनियाद की खासियत बतायेगा और जब आप इनके चंगुल मे फंसकर इसका शिकार होंगे तो आपसे पल्ला झाड़कर आपको अपराधी और असमाजिक तत्व घोषित कर देगा। इसकी बुनियाद ट्रीगर है बंदूक और तलवार है वो इसको चलाने के लिए आपको उकसायेगा और संवैधानिक दोषी आप होंगे और आपके परिवार की आर्थिक कमर टूट जायेगी आपका नैतिक पतन हो जायेगा।
आप सोचिए दिमागी नक्सल कितना खतरनाक है और प्रधानमंत्री ने इसी से लड़ने के लिए खास फौज बनाने की घोषणा की है। यह समाज के दुश्मन है। ये आपस मे ही सबको लड़ा-भीड़ाकर समाप्त कर देने वाली योजनाबद्ध कोशिश है। ये हथियार और पैसे भी उपलब्ध कराता है,ये नैरेटिव का जाल बिछाता है। ये बकायदा इस देश मे चल रहे विदेशी फंडिंग से चल रहे NGO है।
यह समाजवाद,वामपंथ,सेक्युलरिज्म के कार्टेल से चल रहे सामाजिक दुश्मनो का राजनैतिक गठजोड़ है,एसे मे पी चिदंबरम का खुद को दिमागी नकस्ली घोषित करना कांग्रेसी दिवालिया पन और देश विरोधी सोच को स्पष्ट करता है, सावधान रहे। नजर रखिए।
:दिमागी नक्सलियों की पहचान-
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1. जो कहे कि फैसला संसद में नहीं सड़क पर होगा-
2. जो कहे भारत तेरे टुकड़े होंगे –
3. जो धारा 370 की वापसी की बात करें-
4. जो कश्मीर को भारत का अंग नहीं मानता-
5. जो हिंदू देवी देवताओं का अपमान करता है-
6. जो सनातन धर्म का अपमान करता है-
7. जो देश के विकास में बाधा उत्पन्न करता है-
8. जो देश की सेना के विरुद्ध अपमानजनक बात करता है-
9. जो भोले भाले आदिवासियों को हिंसा के लिए प्रेरित करता है-
10. जो इस्लामी आतंकवादियों का हमदर्द है-
11. जो राम मंदिर का विरोध करता है-
12. जो हिंदू आस्था और परंपरा का विरोध करता है –
13. जो उमर खालिद का हमदर्द है-
14. जो सर्जिल इमाम का हमदर्द है-
15. अफजल गुरु को गुरु मानता है-
16. जो चीन को अपना बाप मानता है-
17. जिसे राष्ट्र गान, राष्ट्र गीत और राष्ट्रवाद से नफरत है-
और सारे मोदी या भाजपा विरोधी ऐसे हैं तो फिर अकर बकर की जरूरत नहीं वह दिमागी नक्सली ही हैं-
आइए हम इन दिमागी नक्सलियों का चुन चुन जर सफाया करें ताकि समाज के ये बदबूदार गड्डे देश और देशवासियों का अहित न कर सकें।
जागो और जगाओ भारत, दिमागी नक्सली भगाओ भारत
आप अपनी राय कमेंट में जरूर लिखकर बताएं कि आपके आस पास दिमागी नक्सली कितने और कौन कौन हैं?

