इंदिरा गांधी का तांत्रिक प्रयोग : ढोंग्रेस का काला अध्याय
कभी सोचा है कि क्यों भारत की आज़ादी का श्रेय सिर्फ गांधी नेहरू को दिया जाता रहा जबकि सुभाषचंद्र बोस, भगत सिंह, रासबिहारी बोस, वीर सावरकर, लाल लाजपतराय, बाल गंगाधर तिलक, बिपिनचंद्र पॉल, स्वामी श्रद्धानंद जैसे रणबांकुरों के त्याग बलिदान और सरदार पटेल, अम्बेडकर, श्यामाप्रसाद मुखर्जी, आचार्य कृपलानी जैसे महापुरुषों ने इस राष्ट्र के निर्माण में अभूतपूर्व योगदान दिया?
क्या भारत में इतने वर्षों तक एक नकली गांधी नेहरू खानदान का शासन और उसकी काली छाया आज भी मंडरा रही है, इसके पीछे कोई काला जादू या तंत्र विद्या है?
वर्तमान पीढ़ी संभवतः यकीन ना कर पाए, “लोकतंत्र और संविधान की रक्षा” का नारा उछालने वाले उनके प्रौढ़ नायक Rahul Gandhi की दादी #आयरन_लेडी इंदिरा जी ने यह कार्य भी किया था? हमारी पीढ़ी किन #रहबरों के काली परछाई से गुजरी?
पहले निशिकांत दुबे जी का ट्वीट…….पढ़िए
कांग्रेस का काला अध्याय
153. 15/ 16 अगस्त 1973 की मध्यरात्रि में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी ने लाल क़िला परिसर में 32 फ़ीट गड्ढा खुदवाया और टाईम कैप्सूल उसमें खुद से डाला।
कारण जादू टोना और तांत्रिक क्रिया थी। सत्ता के गलियारों में स्वामी धीरेन्द्र ब्रह्मचारी जी का प्रभाव परवान पर था, स्वामी जी का इतना प्रभाव था कि बंदूक़ की फैक्ट्री के साथ दिल्ली के अशोक रोड पर 5 एकड़ का सरकारी बंगला उनके आश्रम के लिए आवंटित कर दिया गया था।
उन्होंने इंदिरा गांधी जी को तीन टाइम कैप्सूल #तंत्र_विद्या से लगाने का आदेश दिया, इंदिरा जी ने पहला कैप्सूल यमुना नदी के श्मशान में नेहरु जी की समाधि के पास 27 मई 1972 को, दूसरा उसी शमशान पर राजघाट पर 30 जनवरी 1973 को तथा तीसरा लालकिला शमशान में 15/16 अगस्त 1973 को गाड़ा।
इस तंत्र क्रिया से नेहरु गांधी परिवार ज़िंदगी भर दिल्ली के सत्ता पर येन-केन तरीक़े से बैठा रहेगा।
दो कैप्सूल अभी भी ज़मीन के अंदर मौजूद है तीसरा 1977 में निकला गया, जिसमें मनुष्य की खोपड़ी, जानवरों की हड्डी, सोना,चॉंदी तथा भारत का इतिहास निकला।
जिसमें सरदार पटेल जी, महात्मा गांधी जी, अम्बेडकर जी, नेताजी सभी ग़ायब, उस कैप्सूल के काग़ज़ के अनुसार पूरे आज़ादी को कृष्ण भगवान की तरह नेहरु गॉंधी परिवार ने सँभाला।
……….
भाजपा सांसद Dr Nishikant Dubey का यह ट्वीट राज परिवारों के अतीत को लेकर दो प्रश्नों पर सोचने को विवश करता है।
■ एक, संसदीय लोकतंत्र में भी राजसत्ता पर काबिज हुआ #परिवार अपनी आने वाली संतति को भी राजसत्ता से बाहर देखने की कल्पना नहीं कर सकता। चिंता राष्ट्र की नहीं, चिंता अपनी भावी पीढ़ी की?
■ दूसरे, सामान्य हिन्दू के जिन ज्ञान विद्या के कार्य को #अंधविश्वास बोल मजाक उड़ाया जाता है, राज परिवारों के #श्रीचरणों में जाकर वही अंधविश्वास #अमोघ_शक्ति बन जाता है।
एक तीसरा प्रश्न भी है – क्या वर्तमान पीढ़ी को अब भी भारतीय सनातन शक्ति एयर वेद विज्ञान की विधाओं -ज्योतिष, तंत्र विद्या, रत्न रूद्राक्ष, सम्मोहन उच्चाटन आदि कलाओं पर संदेह है?
निस्संदेह, इतिहास का #पुनर्पाठ रुकना नहीं चाहिए। सही इतिहास का ज्ञान सभी का अधिकार है और कर्तव्य भी।
आपकी क्या राय है, कमेंट में अवश्य लिखें और इस लेख को अपने सोशल मीडिया ग्रुपों में शेयर फ़ॉरवर्ड करें। यह भी एक परोपकार है।
जागो और जगाओ भारत, ढोंग्रेस मुक्त बनाओ भारत
#AcharyaRishiVaradanand #VaradVaani #Astrology

