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क्या आपके जीवन में दुःख, पीड़ा या कोई संकट है?

मनुष्य की बुद्धि और धैर्य की परीक्षा संकट के समय होती है। क्या आपके जीवन भी किसी संकट या समस्या अथवा दुःख से गुजर रहा है तो नीचे लिखे उदबोधन को अंत तक दो चार बार अवश्य पढ़कर थोड़ा चिन्तन मनन कीजिये।

जैसे सामान्य और शांत दिनों में किसी भी पेड़ की खूबसूरती उसके हरे-भरे पत्तों, डालियों और फूलों से आंकी जाती है। ऊपरी तौर पर देखने पर हर पेड़ मजबूत और सुंदर दिखाई देता है। लेकिन पेड़ की असली मजबूती का पता तब तक नहीं चलता जब तक कि कोई भयंकर तूफान या आंधी न आए। जब तेज हवाएं चलती हैं, तो सबसे पहले पेड़ के पत्ते झड़ते हैं, सूखी टहनियां टूटकर गिर जाती हैं। यह इस बात का प्रतीक है कि संकट के समय हमारी बाहरी चकाचौंध, धन-दौलत, झूठा अहंकार और दिखावटी रिश्ते सबसे पहले हमारा साथ छोड़ देते हैं।

लेकिन आंधी का असली मकसद पत्तों को गिराना नहीं होता। आंधी अनजाने में ही सही, यह परख लेती है कि उस पेड़ की जड़ें जमीन में कितनी गहराई तक धंसी हुई हैं। जिस पेड़ की जड़ें मजबूत, गहरी और जमीन से मजबूती से जुड़ी होती हैं, वह आंधी के थपेड़ों को झेलकर भी शान से खड़ा रहता है, भले ही उसके सारे पत्ते क्यों न झड़ गए हों। इसके विपरीत, जिस पेड़ की जड़ें कमजोर या उथली होती हैं, वह आंधी के एक ही झोंके में उखड़ जाता है, चाहे उसके पत्ते कितने ही घने और सुंदर क्यों न रहे हों।

ठीक इसी तरह, इंसान के जीवन में जब दुखों या असफलताओं का दौर आता है, तो वह यह देखने आता है कि इंसान अंदर से कितना मजबूत है। उसका धैर्य, उसका विवेक, उसके मूल्य और उसकी मानसिक दृढ़ता कितनी गहरी है। संकट के समय कमजोर मानसिकता वाले लोग जल्दी टूट जाते हैं, क्योंकि उनका आधार केवल बाहरी चीजों पर टिका होता है। लेकिन जो लोग नैतिक रूप से मजबूत होते हैं, जिनका आत्मबल गहरा होता है, वे विपरीत परिस्थितियों में भी विचलित नहीं होते।

यह विचार हमें यह संदेश देता है कि हमें अपने जीवन में केवल बाहरी दिखावे, नाम या ऊपरी सफलता (पत्ते) को बटोरने में ही पूरी ऊर्जा नहीं लगानी चाहिए। इसके बजाय, हमें अपने चरित्र, विचारों की गहराई, धैर्य और आत्मबल (जड़) को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए। अगर हमारी आंतरिक जड़ें मजबूत हैं, तो जीवन की कोई भी आंधी हमारा अस्तित्व नहीं मिटा सकती, और तूफान थमने के बाद हम फिर से नए पत्तों के साथ लहलहा उठेंगे।

आपका संकट शीघ्रता से समाप्त हो जाय, यही मंगलकामना है

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