सियार के रंग में दो भेड़िए – गाँधी नेहरू
मेरी व्यक्तिगत राय पूछें तो मैं गांधी को एक मुस्लिम परस्त , बेहद ऐयाश , हिंदू विरोधी और बिना किसी जिम्मेदारी के सत्ता की चाह रखने वाला अंग्रेज़ों के एजेंट के रूप में जानता हूं जिसने आजादी के नाम पर भारत की बहुसंख्यक हिंदू आबादी के साथ लगातार छल किया !
ब्रह्मचर्य प्रयोग के नाम पर कमसिन छोकरियों के साथ बुढ़ापे में भी अपनी मर्दानगी जंचवाना, गांधी का प्रिय शगल था ! यह मैं नहीं , स्वयं गांधी ने अपनी किताब माई एक्सपेरिमेंटेशन विद ट्रुथ में स्विकार किया है !
गांधी की बकरी हमेशा मशहूर रही क्योंकि गांधी हमेशा बकरी का दूध ही पीता था ! यहां तक कि जेल में भी उसके लिए अंग्रेज बकरी के दूध का इंतजाम करते थे ! जानते हैं क्यों?
इसलिए कि बकरी के दूध मे एफ्रोडाइटिक गुण समान्य गाय या भैंस के दूध से ज्यादा होते हैं जो गांधी को ब्रम्हचर्य प्रयोग में ज्यादा लिबिडो देता था !
बिना किसी जिम्मेदारी के सत्ता लोलुपता में अंधे गांधी ने सरदार पटेल को पीछे धकेल कर एक बिलो एवरेज नेहरू को प्रधानमन्त्री बना दिया जिसकी व्ह्यु रचना गांधी ने १९३९ में ही सुभाष चन्द्र बोस को कांग्रेस अध्यक्ष पद से जबरन हटवा कर सुरु कर दी थी !
नेहरू भी गांधी जैसा ही मुस्लिम परस्त अंग्रेजों का एजेंट था ! अंग्रेजों के माफिक नेहरू को भी ब्राड गेज और मीटर गेज दोनो ही पसंद थे ! लार्ड माउंटबेटन और लेडी माउंटबेटन दोनों से उसकी समान नजदीकी का यही राज़ था !
इन्हीं समानताओं के कारण नेहरू गांधी को बेहद प्रिय था क्योंकि गांधी भी इसी मर्ज से ग्रसित था ! यह केवल मैं नहीं , न्युयोर्क टाईम्स के पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित मशहूर पत्रकार जोसेफ लेलिवेल्ड का भी कहना है !
महात्मा गांधी पर विवादित किताब लिखने वाले जोजेफ लेलीवेल्ड का दावा है कि उन्होंने अपने मन से कोई बात नहीं लिखी है, बल्कि जो भी लिखा है उसका सबूत है. लेखक का कहना है कि ये सबूत भारत में मौजूद हैं और प्रकाशित हो चुके हैं.
गांधी को अच्छी तरह पता था , कोई कुछ करे या न करे , अंग्रेजों को भारत से बिदा होना ही था ! इसलिए सुरु आत से ही उसने ऐसा माहौल खड़ा किया कि अंग्रेजों के जाने के बाद भी भारत की सत्ता पर उसी की पकड़ रहे !
गांधी अपनी चाल में पूरी तरह कामयाब रहा ! खुद बगुला भगत बना अंग्रेजों की एजेंटी के साथ चरखा चलाता रहा और मौका पड़ते ही नेहरू को स्टैम्प प्रधानमंत्री बनाकर रिमोट अपने हाथ में रख लिया !
लेकिन ईश्वरीय न्याय भी तो होता है ? विभाजन जनित त्रासदी , जिसमें लाखों हिंदू मारे गए, करोड़ों हिंदू शरणार्थी बन गए और लाखों हिन्दू महिलाओं का बलात्कार हुआ , इन सबका खलनायक गांधी ही था !
आखिर उसके कुकर्मों की सज़ा उसे मिली और ईश्वरीय प्रेरणा से अभिभूत नाथूराम गोडसे द्वारा उसका वध हो गया !
गाँधी जब तक गजलें बन्धुवों के साथ चलतें रहें तब तक अपना चाल चलन जो इंग्लैण्ड दक्षिण अफ्रीका से गिर चुका था को संयमित कियें रहें और चंपारण में नील की खेती के मजदूरों की स्थिति देखने-सुनने के लिए जातें समय नदी के किनारे पत्थर की ओट में भीगी धोती लपेटकर सिकुडी बैठी महिला की दरिद्रता से पसीज कर बस्त्र त्याग से लगुंटी में आकर प्रसिध्द प्राप्त कर गयें।
फिर हमारी एक बहुत बड़ी कमजोरी है कि अंग्रेजी पढें बोलतें व्यक्ति नें एक अच्छा काम कर लिया तब हम उसे अपना ईष्ट मानने में देरी नहीं करतें।
इनकी छवि को देख कर पाँच बीबी वाले मोती खान नें अपनें मुबारक अली थूसु रहमानी के बडे बेटे सौतेले बेटे जवार हुसैनी को आदेश दियां कि इस नंगे को किसी भी तरह अपनी मुट्ठी में करों।
इसके बाद जवाहरलाल नेहरू जी नें गाँधी जी की यात्राओ सभाओं में भोजन ठहरने की व्यवस्था करतें हुए थके हारे गाँधी जी की सेवा में अपनी सेविकाओ को सिखा पढा कर भेजा।
1930से100=00 रूपया मासिक वृति गाँधी जी को अंग्रेजों से दिलवा दी।
हम मूर्ख हिन्दू इतना भी न तब न अब समझ पा रहें हैं कि इन दोनों नें जेल में कैसे इतनी मोटी मोटी पोथियों को लिखा और अंग्रेजों नें जेल में कागज पेन स्याही मेज रेडियों अखबार के साथ दिन रात युवा सुन्दर महिलाओं को इनकें साथ रहनें की छुट दी।
दिखावें में जितेन्द्रिय बनने के लिए प्रेरित कर नेहरू नें इनके पास रोज नयी नयी औरतों का शौकीन गाँधी जी को एक दिन सावरमति की सभी महिलाओं को अन्यत्र भेजा दियां और फिर बेचैन गाँधी जी के साथ नग्न सोने के लिए कहतें हैं कि इनकी संगी किशोरावस्था संवेगो की ज्वाला में धधकती नग्न नातीन को अपनें साथ नशा करवा कर कर्मफूटे गाँधी जी के पास भेजा और फिर इन दोनों की आपत्तिजनक नग्न फोटों खिंचवा दी।
ऐसे हीं हर महिला के साथ नग्न सोने की फोटों पहलें से खिंचवाते थे और शून्य वोट पानें पर एकतरफा वोट पायें पटेल जी को हटा कर कांग्रेस अध्यक्ष से प्रधानमंत्री पद पर कब्जा करनें के लिए इन्हीं रंगीन फोटों को सार्वजनिक करनें की धमकी देकर ब्लैकमेल कर कांग्रेस अध्यक्ष से प्रधानमंत्री पद पर कब्जा किया।
इसके बाद नेहरू जी का हर आदेश मानतें गयें। डाइरेक्ट एक्शन हो या लाहौर में दियां भाषण सब में हिन्दू बिरोधी भाव थें ।
हम आज भी इन दो सियार के रंग में रंगे भेड़ियों को जिन्होंने धर्म के नाम पर देश के तीन टुकड़े करनें के लिए साजिश रची, इनके काले कारनामों को खुलकर बताने में हिचकते झिझकते हैं और इनके गुणगान को इतने बाध्य हैं कि न तो नोटों पर से एक की फोटो हटा पा रहे हैं और न दूसरे की छल कपट भरी गजवा ए हिन्द की नीतियों से निजात पा रहे हैं।
हिम्मत हो तो यहां कमेंट में दोनों के मुर्दाबाद का नारा लिख कर अपने जीवित होने और सच्चे हिंदुस्थानी होने का प्रमाण दें…


