खानपानजन जागरणराजनीति राष्ट्रनीतिसम सामायिक विश्लेषणसस्ता मन्दास्किल डेवलपमेंट

मोदी जी की ‘झालमूढ़ी डिप्लोमेसी’

*मोदी जी की ‘झालमूढ़ी डिप्लोमेसी’:*
*१० रुपये का नाश्ता और विपक्ष का ‘ब्रेन फ्रीज’!*

कल बंगाल की सड़कों पर एक अद्भुत नज़ारा दिखा। देश के प्रधानमंत्री ने १० रुपये की झालमूढ़ी खरीदी और उसे जनता के बीच बैठकर बड़े चाव से खाया। सोशल मीडिया पर लोग अपनी-अपनी राय दे रहे हैं, लेकिन इसके पीछे के ‘व्यंग्य बाण’ कुछ और ही कहानी कह रहे हैं:

*१. राजकोषीय अनुशासन (Fiscal Discipline):*
लोग कह रहे हैं कि मालिक थोडा बड़ा दिल दिखाते, डेढ़-दो सौ रुपये की खरीद लेते! पर भाई साहब, इसे ही तो ‘मितव्ययिता’ कहते हैं। मोदी जी ने १० रुपये देकर साफ कर दिया कि “न ज्यादा खाऊंगा, न (मुफ्त में) खाने दूंगा।” अगर वो गृहस्थ होते, तो ये १०-१० रुपये बचाकर अब तक दिल्ली में १५० गज का प्लॉट पक्का कर चुके होते!

*२. पुलिसकर्मियों के लिए ‘खतरनाक’ संदेश:‍♂️*
प्रधानमंत्री को ईमानदारी से १० रुपये दुकानदार के हाथ में देते देख उन पुलिसवालों के पेट में मरोड़ उठ गई होगी, जो ‘पिताजी का माल’ समझकर कभी किसी की सब्जी तो कभी किसी का समोसा मुफ्त में डकार जाते हैं। मोदी जी ने बिना कुछ बोले ही समझा दिया कि— “जब पीएम पैसे दे सकता है, तो तुम्हारी वर्दी क्या ‘फ्री पास’ है?”

*३. “दिमाग नहीं खाता हूँ”— एक ‘सर्जिकल स्ट्राइक’:*
दुकानदार ने पूछा— “साहब, प्याज खाते हैं?”
मोदी जी का जवाब आया— “हाँ, प्याज खाता हूँ, पर दिमाग नहीं खाता!”
अब इस बात की तो कड़़ी निंदा होनी चाहिए! मोदी जी ने भले ही कहा हो कि वो दिमाग नहीं खाते, लेकिन सच तो ये है कि उन्होंने पूरे विपक्ष (विशेषकर राहुल गांधी जी) का दिमाग ऐसा ‘रोस्ट’ किया है कि उनका सिस्टम ही हैंग हो गया है।
पूरा विपक्ष मिलकर भी मोढ़ी जी की राजनीति की ‘एल्गोरिदम’ नहीं पढ़ पा रहा। हालत यह है कि मोदी जी झालमूढ़ी चबाते हैं और वहां विपक्ष में ‘इमरजेंसी मीटिंग’ शुरू हो जाती है!

*४. आत्मनिर्भर झालमूढ़ी और वैश्विक निवेश: *
वो दुकानदार अब सेलिब्रिटी बन चुका है। हो सकता है बंगाल चुनाव के बाद वह ‘आत्मनिर्भर झालमूढ़ी उद्योग’ डाल ले और अड़ानी-अम्बानी उसमें निवेश करने आ जाएं।
आखिर जिस ब्रांड का विज्ञापन खुद प्रधानसेवक ने सड़क पर खड़े होकर कर दिया हो, उसका ‘मार्केट कैप’ तो आसमान छूना ही है!

विश्वस्त सूत्र बता रहे हैं कि इटली वाली मैडम मेलोनी जी जरूर मोदी जी से नाराज बताई जा रही है की मोदी जी ने अकेले झालमुड़ी क्यों खाई।

*कुल मिलाकर १० रुपये की मोदी में मोढ़ी जी ने जो ‘राजनीति का मसाला’ मिलाया है, उसने मुफ्तखोरों का हाजमा और विपक्ष का गणित, दोनों बिगाड़ दिया है।*
यह सिर्फ नाश्ता नहीं था, यह ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका (सिर्फ १० रुपये में) विश्वास’ था!
*अब झालमुड़ी को वैश्विक ब्रांड बनने से कोई रोक नहीं सकता ममता की ममता भी नहीं *

*मोदी जी ने १० रुपये में बंगाल चुनाव जीत लिया है, इसे कहते गुजराती मितव्ययी व्यक्ति है।*

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button