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हिन्दुराष्ट्र बनने से क्या लाभ?0

 

भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने से क्या लाभ होगा ? 

आज भारत को यदि सबसे बड़ी कोई आवश्यकता है तो वह है हिंदू राष्ट्र बनाने की. इससे क्या लाभ होगा, तो आइए जानते कि ये क्या क्या लाभ होंगे।

संक्षेप में कहें तो हिंदू राष्ट्र बनने से आप हिंदुओं के फेवर में सनातन धर्म के समर्थन में नियम बना सकेंगे. कानून बना सकेंगे, संविधान बना सकोगे और आप हिंदुत्व को आगे हजारों साल के लिए बचा सकोगे. यह आपके पास एक बहुत ही अप्रतिम मौका मिला है आपको यह मौका नहीं छोड़ना चाहिए. भारत में सब राजनीतिक दलों और सब संस्थाओं हिंदू संगठनों को इस बारे में जागृत करना चाहिए.

आइए अब विस्तार से भारत के हिन्दुराष्ट्र बनने के सकारात्मक पहलुओं पर चर्चा करते हैं।

सबसे पहले तो हमें अच्छी तरह जान लेना चाहिए जैसा कि हमारे शास्त्रों और ग्रंथों में भी वर्णित है कि राज्य धर्म का ही एक भाग होता है। राजनीति धर्म से ही निर्धारित व संयमित होती है।

एक उदाहरण से समझें कि जिस गौहत्या को रोकने के लिए गांधी जी कहते थे वह रुकी ? देश स्वतंत्र होने के बाद भी गौहत्या नहीं रूकी है न कभी रूक सकती है। क्योंकि भारत का संविधान निधर्मी है।अब आप स्वयं बताएं कि यदि भारत हिंदू राष्ट्र घोषित हो जाएगा तब क्या गौ हत्या हो सकती है❓❓❓

दूसरी बात, भौगोलिक स्थिति की, तो अफगानिस्तान पाकिस्तान बंगलादेश नेपाल भूटान तिब्बत मयांमार श्रीलंका मलेशिया सिंगापुर थाईलैंड इंडोनेशिया कंबोडिया वियतनाम : यह सब क्षेत्र हिंदू राष्ट्र के अंग रहे हैं। आज हमारा देश कम होता जा रहा है। जो भारत अब बचा है व हिंदू बहुल है वह भी निधर्मी है, हिंदू राष्ट्र नहीं है। जो बचा है उसे तो हमें हिंदू राष्ट्र घोषित करना चाहिए नहीं तो यह भी नहीं बचेगा।

तीसरी बात हिंदुओं की घटती जनसंख्या जिसका एक बड़ा कारण हिंदुओं के इस्लाम और ईसाइयत में धर्मांतरण रहा है जिसके मूल में बात है फंडिंग की। इसलाम को अरब देशों से फंडिंग मिलती है। मुसलमानों को इसलाम को फैलाने के लिए मुसलमान देशों से पैसा मिलता है। ईसाईयों को वेटिकन से और अमेरिका से पैसा मिलता है कन्वर्जन करने के लिए। हिंदुओं को कहीं और से पैसा नहीं मिलता। इसलिए हिंदू कमजोर हो रहा है। हम इस विदेशी फंडिंग के आगे नहीं टिक सकते। इस विदेशी मदद के चलते हिंदू धर्म कुछ समय बाद भारत में भी समाप्त हो जाएगा। हिंदू राष्ट्र बनने से काँवर्जन पर रोक लगेगी |

चौथी बात है भारत मे हिंदुओं में जातिवाद की : यदि भारत में मुसलमान व ईसाई का वर्चस्व न रहें तो जातिवाद समाप्त हो जाएगा । जातिवाद इन्हींं दो विदेशी पंथों की देन है । इसलिए जातीय गृहयुद्ध होना अवश्यम्भावी है। जब तक ये विदेशी आक्रांता भारत में नहींं आए थे तब तक कभी भी भारत में जातिय संघर्ष नहीं हुआ । भारत में जातिवाद के लिए मुसलमान व ईसाई ही जिम्मेदार हैं ।

पांचवी लाभ की बात यह है कि भारत हिंदू राष्ट्र घोषित होगा तो सनातन संस्कृति के पोषण के लिए कानून बन सकेंगे जो भारत की मूल संस्कृति है |

छठी बात है हिंदुओं के अस्तित्व की जिसे धर्मांतरण, विधर्मियों के जनसंख्या जिहाद और बदलती डेमोग्राफी के कारण खतरा पैदा हो गया है। जगह जगह घुसपैठ और पलायन के कारण हिंदुओं की उपस्थिति घटती जा रही है और मुस्लिमो का वर्चस्व बढ़ता जा रहा है।

ये भारत के हर राज्य, हर शहर – कस्बे में हो रहा है।भारत की डेमोग्राफी तेजी से बदल रही है, भारत के अंदर सैकड़ों पाकिस्तान जन्म ले चुके हैं। हिंदू राष्ट्र न बना तो यह देश तो रहेगा पर इसमें से हिंदू मिट जाएगा। जब तक देश में निधर्मी शासन (सेकूलर) है तब तक हिंदुओं को संरक्षण नहीं मिलने वाला। केवल हिंदू राष्ट्र की मांग ही हिंदुओं के हितों की रक्षा का एकमात्र उपाय है।

सातवीं बात, ऐसी आदर्श राज्य व्यवस्था,  जिसको याद करके हम संतुष्ट होते हैं? तो वह है रामराज्य, जिसको सर्वश्रेष्ठ कहा जाता है ।एक धोबी का, एक आम जन का भी मान था। जनता की आवाज राजा तक सुनी जाती थी । आदर्श चक्रवर्ती राज्य था ! अत्याचारियों को सजा दी जाती थी। उन को नियंत्रित किया जाता था यही है हिंदू राष्ट्र । रामराज्य हिन्दू राष्ट्र में ही संभव है न की निधर्मी शासन में |राम राज्य के बाद एक और चक्रवर्ती सम्राट हुए हैं जिनके नाम से हमारा कैलेंडर यानि संवत बना है। अधिकांश लोग इनका नाम नहीं बता पाऐंगे क्योंकि कोर्स में नहीं पढाया जाता है। वह हैं चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य व उनके नाम पर बना विक्रमी संवत हिंदू कैल्ंडर है। इन्हीं के काल से भारत को सोने की चिड़िया भी कहते हैं। वैसे भारत भूमि का स्वर्ण युग गुप्त काल कहलाता है। चंद्रगुप्त, समुद्रगुप्त आदि हिंदू राजाओँ के समय में भारत की सेना, नौसेना, व्यापार व कला चरमोत्कर्ष पर रही। यह होता है हिंदू राष्ट्र ।भारत जब पुन: हिंदू राष्ट्र बनेगा तो भारत का स्वर्णिम इतिहास लौटकर आएगा।

आठवीं बात, वर्तमान में हिन्दू धर्म की उपलब्धियों को ठीक से बताया नहीं जाता जिसके कारण एक हिन्दू अपने धर्म पर उतना गर्व नहीं कर पाता जितना उसे करना चाहिए। उसका मध्य एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया के प्राचीन और आधुनिक हिन्दुओं के बारे में जानना तो दूर की बात है। सच तो यह है कि अफगानिस्तान के प्राचीन हिन्दुओं (शाही वंश व उनके पहले के अफगान राजाओं के समय के लोगों) के बारे में भी उसका ज्ञान नहीं रह जाता। हिन्दू सृष्टिवाद, हिन्दू वैश्विक दृष्टिकोण के बारे में भी उसे ज्ञान नहीं रहता। जबकि पश्चिम के ऐसे विचारों(जैसे आदम और हव्वा से मानववंश चलने की बात) की जानकारी उसे होती है। वह हिन्दू धर्म के बारे में इतना जान ही नहीं पाता कि वह उस पर गर्व कर सके। भारत के हिन्दू राष्ट्र बनने से यह स्थिति बदल सकेगी।

नौंवी बात, हिन्दू राष्ट्र बनने से उन मुसलमानों व ईसाईयों को राष्ट्र की मुख्य धारा में लाया जा सकेगा जो इस्लाम व ईसाई धर्म के अभारतीय रूप को(ऐसे रूप को जिसमें अभारतीय नाम रखना और अभारतीय भाषाओं में अभारतीय रीति से पूजा करना धर्म का प्रचलित रूप है।)अपने धर्म का सारवान तत्त्व समझकर उसे अपनाये हुए हैं। भारतीय भाषाओं को इससे अधिक उचित स्थान मिल सकेगा।

और अंत में, दसवीं महत्वपूर्ण बात,  जो कि विचारणीय है – आज विश्व के देशों में धर्म की स्थिति क्या है | ये देश के गठन और बुनियादी कानूनों के साथ-साथ सरकारी और गैर सरकारी संगठनों के माध्यमिक स्रोतों के एक नए प्यू रिसर्च सेंटर विश्लेषण के महत्वपूर्ण निष्कर्षों में से हैं। विश्व में ५८ इस्लामिक मुल्क हैं, सौ से अधिक ईसाई कंट्री है, दो बौद्ध देश हैं, एक यहूदी देश है | भारत के हिन्दू राष्ट्र बनने से कितने अन्य देश भी हिन्दू राष्ट्र का हिस्सा बनना पसंद करेंगे जिससे कि अखंड भारत एक हिंदवी साम्राज्य बनेगा

अगले लेख में हम चर्चा करेंगे कि हिन्दुराष्ट्र बनने के साथ भारत के अखंड भारत बनने के क्या अर्थ हैं और अखंड भारत बनना चाहिए भी या नहीं?

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*गर्व से कहो हम हिंदू हैं, हिंदुस्थान हमारा है।*

*एक ही लक्ष्य हिन्दुराष्ट्र*

हिंदू राष्ट्र पर आपके विचार आमंत्रित हैं…कमेंट ने लिखकर बताएं कि आप इस लेख से कितने सहमत हैं और आप क्या सुझाव देना चाहेंगे।

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