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यूजीसी का सच – जागो जनता 

अपनी अक्ल लगाओ

यूजीसी का सच – जागो जनता                          आचार्य ऋषिश्री वरदानंद

️यूजीसी एक्ट हाय-हाय, मोदी सरकार गिराने” की बातें करने वाले सोशल मीडिया के धुरंधरों से एक विनम्र आग्रह—

कृपया पहले तथ्यों को पढ़ लें। उसके बाद कहना कि यूजीसी में क्या सही क्या गलत! हर बार की तरह यूजीसी के मामले भी विपक्षी पक्षियों का टूलकिट ही कलंकित होगा। इसलिए आप भी पहले सत्य को जान लें।

जनवरी 2013 में तत्कालीन केंद्र सरकार द्वारा UGC गजट नोटिफिकेशन जारी किया गया था, जिसमें भेदभाव से जुड़े लगभग सभी वही प्रावधान मौजूद थे।
उस समय शिकायत के निस्तारण का अधिकार केवल एक अधिकारी (Anti-Discrimination Officer) के पास था, यानी शिकायतकर्ता का भविष्य एक व्यक्ति के निर्णय पर निर्भर करता था। वो भी गैर सवर्ण ही होता था।

➡️ मोदी सरकार ने इस व्यवस्था को और अधिक समन्वयपूर्ण, पारदर्शी और समावेशी बनाया।
अब इस नियम में जाति, क्षेत्र, समुदाय, धर्म, लिंग, पिछड़ा वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) एवं दिव्यांगजन—
अर्थात हर प्रकार के भेदभाव को शामिल किया गया है
मतलब अब हर वर्ग, हर जाति और हर धर्म के व्यक्ति को अपने साथ हुए भेदभाव के विरुद्ध शिकायत का अधिकार है। लेकिन विरोधियों ने इसे सिर्फ सवर्णों के विरुध्द बताकर एक नरेटिव सेट किया क्योंकि सवर्ण वर्ग मोदीजी के साथ मजबूती से खड़ा रहा है, इसलिए उसे तोड़ने और छिटकाने के लिये यूजीसी एक अच्छा मौका मिला जिसे ढोंग्रेस के दिग्विजयसिंह की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति के माध्यम से यूजीसी एक्ट बनांकर जनता में तीर छोड़ा जो कि सही निशाने पर लगा।

इसलिए देश भर में यूजीसी को लेकर मोदी हाय हाय यूजीसी हाय हाय शुरू हो गयी। जबकि सच्चाई में नया एक्ट सबको बराबरी का अधिकार देता है और किसी भी प्रकार के भेदभाव को एक जिम्मेदर और सामूहिक निर्णय की प्रक्रिया से जोड़ता है। देखिए नई व्यवस्था में शिकायतों के निवारण की क्या पद्धति है।

शिकायत निस्तारण की नई व्यवस्था
अब निर्णय एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विस्तृत समिति करेगी, जिसमें—
▪️ संस्थान प्रमुख – पदेन अध्यक्ष
▪️ 3 प्रोफेसर
▪️ 2 मेधावी छात्र प्रतिनिधि
▪️ 2 नागरिक समाज के प्रतिनिधि
▪️ 1 गैर-शिक्षण कर्मचारी प्रतिनिधि
➡️ यानी सभी वर्गों की भागीदारी, जिससे निर्णय निष्पक्ष और पारदर्शी हो।

फैलाए जा रहे तीन बड़े झूठ

1️⃣ यह एक्ट पहली बार मोदी सरकार लाई है — गलत
➡️ यह 2013 से ही UGC नियमों में मौजूद है।

2️⃣ यह केवल SC/ST/OBC के लिए है — गलत
➡️ इसमें सवर्ण, EWS और दिव्यांगजन सहित सभी वर्ग शामिल हैं।

3️⃣ कमेटी में सिर्फ आरक्षित वर्ग के लोग होंगे — गलत
➡️ कमेटी में संस्थान प्रमुख, प्रोफेसर, छात्र, समाजसेवी और गैर-शिक्षण कर्मचारी भी शामिल हैं।

इस एक्ट की अहम बातें

✔️ यदि किसी सवर्ण छात्र को जाति के नाम पर परेशान किया जाता है, तो वह भी शिकायत कर सकता है।
✔️ किसी भी व्यक्ति को भाषा, क्षेत्र, धर्म, लिंग या आर्थिक स्थिति के नाम पर भेदभाव होने पर शिकायत का अधिकार है।
✔️ उदाहरण: यदि किसी हिंदी भाषी छात्र के साथ भाषा के नाम पर भेदभाव होता है, तो वह भी शिकायत दर्ज करा सकता है।

⚖️ सुप्रीम कोर्ट ने रोहित वेमुला और पायल ताडवी प्रकरणों की सुनवाई के बाद
उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव रोकने हेतु UGC Regulations, 2026 लाने का निर्देश दिया था।
➡️ सरकार उसी निर्देश के क्रम में यह नियम लाई है।

2013 का विनियम अंग्रेज़ी में है
2026 का विनियम हिंदी में है
➡️ धारा 4 और धारा 7 पढ़ लीजिए।

बाकी यदि विरोध करना है, तो वह आपका लोकतांत्रिक अधिकार है।
सरकार आपकी है—
तो सवाल भी सुनेगी और आलोचना भी।

#UGC #तथ्य_के_साथ #समावेशी_शिक्षा

अंतिम बात:

मैं मोदीजी को एक नेता के रूप में नहीं देखता..आज मुझ जैसे लाखों लोग उन्हें नेता नहीं, देवता मानते हैं, आने वाली पीढियां और पूरी दुनिया उन्हें भगवान का अवतार मानकर पूजने लगे तो कोई आश्चर्य नहीं। इसलिए मैं मोदीजी को कभी कोई आदेश, कोई उपदेश नहीं देता.. क्योंकि इन्हें आदेश या उपदेश देने की न मेरी हैसियत है और ना ही मेरे पास इतना ज्ञान, इतनी बुद्धि है..

लेकिन जो लोग पल पल मोदीजी को गालियां देते रहते हैं.. वे शायद भूल जाते हैं कि जो व्यक्ति देश के लोगों को ही अपना परिवार मानता हो वो कभी अपने परिवार का अहित सोचेगा ही नहीं.. Gen/SC/ST/OBC सभी मोदीजी का परिवार हैं.. मोदी को गाली देने वाले भी उनका परिवार है.. उनकी नजरों में भेदभाव नहीं है.. यह उनकी सरकार की नीतियों में दिखता है.. उनकी योजनाओं का लाभ सभी वर्गों को मिलता है, उन्हें गाली देने वालों को भी, बीजेपी को वोट न देने वालों को भी..

हमारा भविष्य, हमारे देश का भविष्य, हमारे बच्चों का भविष्य बनाने के लिए जिंदगी खपाने वाले मोदीजी को गाली दूं, इतना कृतघ्न नहीं हूं मैं.

आइंदा किसी भी विषय पर मोदी या उनकी सरकार के किसी फैसले पर भड़कने से पहले अपनी अक्ल का सोच विचार कर प्रयोग कर लेवें ताकि दुश्मनों के बहकावे में आकर भ्रमित न हों और देश का नुकसान करने से बच जाएं।

जय हिंद जय भारत जय जय राम

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