लव जिहाद का घिनौना चेहरा मजहब के नकाब में

वैसे तो लव जिहाद की लाखों कहानियां हो चुकी है और रोंगटे खड़े कर देती है, ऐसी ही यह एक कहानी दिमाग की खिड़कियां खोल देगी और आपको सोते से जगा देगी।
लव जिहाद में आप भी निशाने पर हो सकते हैं…!
धार्मिक प्रवृत्ति के निसंतान अतुल चंद्र सरकारी कर्मचारी व पत्नी सीमा ग्रहणी दम्पति को एक दिन खबर मिली कि एक सड़क दुर्घटना में एक कन्या बची है, जिसके मां-पिता दुर्घटना की भेंट चढ़ गए। वे रोती-बिलखती कन्या को अपने घर ले आये और कानूनी रूप से गोद ले लिया, जो अब 23 वर्ष की आई.टी इंजीनियर बनकर एक कम्पनी में कार्यरत है।
ऐश्वर्या बेहद खूबसूरत, अच्छी नौकरी व ऊपर से मां-बाप की करोड़ों की चल-अचल संपत्ति की इकलौती वारिस एक शिकारी-बाज़ मोहम्मद इकलाख के लव-जिहाद-जाल में फंस गई, जो एक बेरोजगार जिहादी था। अल्लाह की कृपा से ऐश्वर्या उसके लिए आंनद, प्रमाद और आय का साधन बन गई।
ऐसी खूबसूरत, इकलौती व धनवान युवतियों पर जिहादियों की विशेष निगाह/कृपा रहती है। जिसके माध्यम से उम्मा की जनसंख्या इजाफा, परिवारिक/सहयोगियों की भोग मशीन के साथ-साथ देर-सबेर इनकी संपति भी इन लव-जिहादिओं के हत्थे लग जाती है।
अतुलचंद्र को अपनी दत्तक पुत्री के लव-जेहाद में फंसने की जानकारी मिलने पर उसे बहुत समझाया। मगर वह टस से मस नहीं हुई। अतुल और सीमा ने तुरन्त निर्णय किया कि वह नागपुर की समस्त संपत्ति बेंच देंगे और अपने गृहनगर पुणे शिफ्ट हो जाएंगे…!
मोहम्मद इकलाख को अपनी योजना के असफल होने का पता चला तो उसने ऐश्वर्या को माध्यम बनाकर उसके बूढे मां-बाप को खरबूजे में इकलाख द्वारा उपलब्ध पदार्थ खिलाकर घर से बाहर निकल गई। पदार्थ मिश्रित खरबूजा खाकर दम्पति बेहोश हो गए। तद्उपरांत जिहादी मोहम्मद ऐश्वर्या के घर में घुसकर बेहोश दंपत्ति के गले काट कर फरार हो गया।
पुलिस पूंछतांछ में ऐश्वर्या टूट गई तो यह जुगुप्सा से भरी लव-जिहाद की यह कहानी प्रकाश में आई!!
सभी सनातनी सजग रहें, सचेत रहें कि ऐसी ही कहानी उनके आसपास तो जन्म नहीं ले रही है…! लापरवाही और अतिविश्वास की कीमत जान देकर चुकानी पड़ती है! इससे बचाव केवल बच्चों को ज्यादा से ज्यादा समय देकर व इस्लामी किताबी के ज्ञान व इस्लामिक विभिषिकाओं से परिचित कराकर ही कर सकते हैं।
इस्लाम में गैर-मुसलमानों (दुश्मन) की औरतों (लौंडी) से व्यभिचार की छूट – “ऐसी औरतों (योनियों) जिनका खाविंद जिन्दा हो, उनको लेना हराम है, मगर जो कैद होकर तुम्हारे हाथ लगी हों उनके लिए खुदा का हुक्म है और उनके सिवाय भी अन्य दूसरी सब औरतें हलाल हैं जिनको तुम मालो अस्बाब देकर कैद से लाना चाहो, न कि मस्ती निकालने के लिए।” (कुरान 4 : 24)
लौंडी का विक्रय जायज – “…जब लौंडी बदकारी करे और उसके फेल(कर्म) की तहकीकात हो जावे तो उसको हद(बन्दिश) लगाई जावे और ड़ाट फटकार न की जावे फिर अगर दुबारा उससे यह फेल सरजद हो तो दोबारा हद लगाई जावे और जज (डांट फटकार) व तौबीख (झिड़कना) न की जावे। अगर तीसरी बार फिर यही अमल करे तो उसे बेच डाले। ख्वाह बाल की रस्सी के मुआवजे में।”(रियाजुस्सालिहीन, पृ. 141)
लौंडी को गिरवी रखना पुण्य – “अगर कोई शख्स अपनी लौंडी (रखैल) को किसी के पास गिरवी रख दे और गिरवी रखने वाला उससे जिना व्यभिचार करे तो उस पर कोई शरायत (शर्त) लागू नहीं, अगर्चे वह जानता भी हो कि यह लोंडी मुझ पर हराम है।” (हिदायहमुतरज्जिम फारसी जिल्द 1हदीस 302 व 303)
गैर-मुस्लिम युवती का व्यभिचार में सहयोग न करने मार डालना जायज – “…अपनी लौडी को ज़िना की बिना पर (जहर देकर) मार डालना दुरूस्त है।” (फताबी खजानतह अलरवायत, पृ.417)
बांदियों से ज़िना – “ऐ पैगम्बर! इस वक्त के बाद… दूसरी औरतें तुमको दुरूस्त नहीं और न यह कि उनको बदल कर दूसरी बीबी कर लो। अगर्चे उनकी खूबसूरती तुमको अच्छी ही क्यों न लगे। मगर बांदिया (और भी आ सकती हैं) और अल्लाह हर चीज को देखने वाला है।” (कुरान 33:53)
ये कैसा मजहब है जो आधी आबादी के साथ इस तरह का वहशियाना वाहियात और हवसी व्यवहार करने की न केवल इजाजत देता है बल्कि उसे प्रोत्साहित करने के लिए जकात धन छल बल सभी अधर्मी कृत्यों को जायज ठहराता है।
इसलिए सभी मानवता के हिमायती और दुनिया के लोग सतर्क सजग ही जाएं।


