पूर्णिमा और अमावस पर मानसिक उग्रता
पूर्णिमा और अमावस पर मानसिक उग्रताय– तंत्र और विज्ञान का रहस्य।।
पूर्णिमा या अमावस के दिन कुछ लोग अचानक चिड़चिड़े, उग्र या हाइपर एक्टिव हो जाते हैं?
यह केवल संयोग नहीं है।
इसमें सूर्य-चंद्र की ऊर्जा, तांत्रिक प्रभाव और हमारे शरीर के जैविक नियम गहरे रूप से जुड़े हुए हैं।
तांत्रिक दृष्टिकोण – सूक्ष्म ऊर्जा का प्रभाव।
सनातन धर्म और तंत्र शास्त्र बताते हैं कि हमारे चारों ओर सकारात्मक और नकारात्मक सूक्ष्म ऊर्जा का प्रवाह होता है।
पूर्णिमा: चंद्रमा पूर्ण रूप से प्रकाशित होता है।
उसकी ऊर्जा अधिकतम होती है, जिससे मानसिक संवेदनशीलता और भावनात्मक सक्रियता बढ़ जाती है।
कुछ लोग अत्यधिक उत्साहित या हाइपर महसूस कर सकते हैं।
अमावस: चंद्रमा अदृश्य होता है।
अंधकार और सूक्ष्म नकारात्मक ऊर्जाओं का प्रभाव बढ़ जाता है।
यह समय भावनात्मक अस्थिरता और चिड़चिड़ापन के लिए अनुकूल होता है।
तांत्रिक उपाय:
पूर्णिमा: ध्यान, मंत्र जप और शांति साधनाल: चंद्रमा की रोशनी और गुरुत्वाकर्षण के बदलाव से नींद का पैटर्न बदल सकता है।
हार्मोन असंतुलन: सेरोटोनिन और मेलाटोनिन का स्तर प्रभावित होता है, जिससे चिड़चिड़ापन और तनाव बढ़ सकता है।
मनोवैज्ञानिक प्रभाव: इन दिनों लोग असामान्य भावनाओं के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं।
वैज्ञानिक उपाय: पर्याप्त नींद लें। योग और प्राणायाम करें।
संतुलित आहार और हल्का व्यायाम मानसिक संतुलन बनाए रखते हैं।
तंत्र और विज्ञान का संगम।।द
पूर्णिमा और अमावस की ऊर्जा को समझकर हम इसे नकारात्मक से सकारात्मक में बदल सकते हैं।
तांत्रिक साधना + वैज्ञानिक उपाय का संयोजन सबसे प्रभावी है।
मंत्र जप, ध्यान, और दीप प्रज्वलन के साथ योग, प्राणायाम और संतुलित दिनचर्या अपनाएँ।
इससे मानसिक उग्रता कम होती है और ऊर्जा का संतुलित प्रवाह होता है।
विशेष सुझाव और सावधानियाँ।।।
पूर्णिमा और अमावस के दिन बिना कारण मानसिक तनाव, झगड़े और उग्रता को नियंत्रित करें।
नकारात्मक ऊर्जा से बचने के लिए घर में तांत्रिक साधना यंत्र या भैरव/हनुमान की मूर्ति रखें।
ध्यान करें कि यह कोई अंधश्रद्धा नहीं है, बल्कि सभी शक्तियों और जैविक प्रक्रियाओं का संयोजन है।
निष्कर्ष:
पूर्णिमा और अमावस केवल खगोलीय दिन नहीं हैं। ये मानसिक, भावनात्मक और ऊर्जा के दृष्टिकोण से विशेष दिन हैं। सही साधना और जीवनशैली अपनाकर आप इन दिनों को अपनी सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने का अवसर बना सकते हैं।
सद्भावना मंत्र:
“ॐ भैरवाय नमः – मानसिक शांति और नकारात्मक ऊर्जा नाश के लिए”
