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हमारे पितामह हमारे गौरव : महर्षि सुश्रुत

हमारे पितामह हमारे गौरव : महर्षि सुश्रुत
*जिस भारतीय ऋषि ने 2600 साल पहले 1120 बीमारियों का रिकॉर्ड जुटाया था, स्कॉटलैंड में उसे मिला सम्मान*
* काशी में महर्षि सुश्रुत ने 2600 साल पहले प्लास्टिक सर्जरी कर नाक जोड़ने का इतिहास रचा था, जिन्हें आधुनिक सर्जरी का जनक माना जाता है.
* यूके के रॉयल कॉलेज ऑफ सर्जन्स ने महर्षि सुश्रुत की कांसे की प्रतिमा स्थापित कर उन्हें आधुनिक शल्य चिकित्सा का पिता स्वीकार किया है.

*महर्षि सुश्रुत को विश्व का पहला सर्जन और “आधुनिक शल्य चिकित्सा का जनक” माना जाता है।*
● लगभग 2600 वर्ष पहले काशी (वाराणसी) में उन्होंने चिकित्सा और सर्जरी के क्षेत्र में अद्भुत उपलब्धियां हासिल कीं।
● महर्षि सुश्रुत ने 300 से अधिक प्रकार की सर्जरी करने का वर्णन किया था।
● उन्होंने 124 से अधिक शल्य चिकित्सा उपकरणों का निर्माण और उपयोग किया।
● आधुनिक प्लास्टिक सर्जरी से सदियों पहले उन्होंने नाक पुनर्निर्माण (Rhinoplasty) जैसी जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक की थी।
● उनकी रचना “सुश्रुत संहिता” को सर्जरी पर दुनिया का पहला और सबसे प्राचीन ग्रंथ माना जाता है।
● सुश्रुत संहिता में 184 अध्याय, 1120 रोगों, 700 औषधीय पौधों, 64 खनिजों और 57 पशु-आधारित औषधियों का उल्लेख मिलता है।
● ग्रंथ में सर्जरी के साथ-साथ बाल रोग, स्त्री रोग, विष विज्ञान, मानसिक रोग और शरीर रचना विज्ञान का भी विस्तृत वर्णन है।
● महर्षि सुश्रुत ने गुरु धन्वंतरि से आयुर्वेद की शिक्षा प्राप्त की थी।
● उनका सिद्धांत था: “जो रोगी के दुख को अपना दुख समझे, वही सच्चा वैद्य है।”
● आज भी आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और सर्जरी में उनके सिद्धांतों का प्रभाव देखा जाता है।
● रॉयल कॉलेज ऑफ सर्जन्स ऑफ एडिनबर्ग (यूके) ने महर्षि सुश्रुत को सम्मानित करते हुए उनकी 90 किलोग्राम वजनी कांस्य प्रतिमा स्थापित की है।
● यह संस्थान विश्व का सबसे पुराना और प्रतिष्ठित सर्जिकल संस्थान माना जाता है।
● यह सम्मान भारत की प्राचीन चिकित्सा विरासत और वैज्ञानिक ज्ञान की वैश्विक स्वीकृति का प्रतीक है।
● प्रतिमा का दान चेरुवू फैमिली फाउंडेशन द्वारा किया गया और इसे तमिलनाडु के एक भारतीय मूर्तिकार ने तैयार किया।

* जब दुनिया आधुनिक सर्जरी से अनजान थी, तब भारत में महर्षि सुश्रुत प्लास्टिक सर्जरी और उन्नत शल्य चिकित्सा की नींव रख चुके थे।*

हमारे पितामह हमारे गौरव : महर्षि सुश्रुत आपको शत शत प्रणाम

जयतु जयतु जय हिन्दुराष्टम जय जय जय जय धर्म सनातन

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