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राम मंदिर अयोध्या में धर्मध्वजा स्थापना

*श्री राम जन्म भूमि मंदिर (अयोध्या जी)*

*ध्वजारोहण समारोह*

️ *दिनांक : मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी, विक्रम सम्वत् 2082, श्री राम विवाह पंचमी, 25 नवम्बर 2025, मंगलवार।*

*ध्वजारोहण*

*श्री नरेंद्र मोदी जी, माननीय प्रधानमंत्री, भारत।*

*डॉ श्री मोहन भागवत जी सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ।*

*के कर कमलों द्वारा।*

✅ *गरिमामय उपस्थिति* ✅

*श्रीमती आनंदीबेन पटेल जी माननीय राज्यपाल, उत्तर प्रदेश।*

*श्री योगी आदित्यनाथ जी माननीय मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश।*

*#जय_सिया_राम*

धर्म ध्वज की विशेषताएं

22 X 11 फीट की लंबाई और चौड़ाई वाला होगा।

विशेष पैराशूट फैब्रिक और रेशमी धागों से निर्मित।

तीनों मौसम के साथ तेज हवा झेलने में सक्षम ।

ध्वज का रंग केसरिया होगा जो धर्म, त्याग और साहस का प्रतीक है।

◇ धर्म ध्वजपर निम्निलिखित 3 तीन चिन्ह अंकित होंगे:

सूर्य – सूर्यवंश का प्रतीक

ॐ – सृष्टि का मूल

कोविदार वृक्ष – इक्ष्वाकु वंश का राज चिन्ह

ध्वज को मंदिर के 161 फीट ऊंचे शिखर पर लगे 42 फीट ऊंचे ध्वजदंड पर फहराया जाएगा।

ध्वज दंड 360 डिग्री घूमने वाले चैम्बर में स्थापित है।

धर्म ध्वज का महत्व

क्या आपको पता है सनातन दर्शन में धर्म ध्वज का क्या महत्व है? आईये जानते हैं।

*वैदिक सनातन धर्म ध्वज*
वेदों में ग्रन्थों में ध्वज का विस्तृत विवरण कई स्थानों में दिया गया है। आईये जानते हैं हमारे ध्वज की महत्ता :,

*अस्माकमिन्द्र: समृतेषु ध्वजेष्वस्माकं या इषवस्ता जयन्तु।*
*अस्माकं वीरा उत्तरे भवन्त्वस्माँ उ देवा अवता हवेषु।।* ऋग्वेद, 10-103-11, अथर्ववेद, 19-13-11
अर्थात्, हमारे ध्वज फहराते रहें, हमारे बाण विजय प्राप्त करें, हमारे वीर वरिष्ठ हों, देववीर युद्ध में हमारी विजय करवा दें। इस मंत्र में युद्ध के समय ध्वज लहराता रहना चाहिये।

*उद्धर्षन्तां मघवन्वाजिनान्युद्वीराणां जयतामेतु घोष:।*
*पृथग्घोषा उलुलय: केतुमन्त उदीरताम्।।* अथर्ववेद, 3.19.6
अर्थात्, हमारी सब सेनाएं उत्साहित हों, हमारे विजयी वीरों की घोषणाएं (आकाश में) गरजती रहें, अपने-अपने ध्वज लेकर आनेवाले विविध पथों की घोषणाओं का शब्द यहां निनादित होता रहे।

*अमी ये युधमायन्ति केतून्कृत्वानीकश:*। वही, 6.103.3 अर्थात्, ये वीर अपनी सेना की टुकडिय़ों के साथ अपने ध्वज लेकर युद्ध में उपस्थित होते हैं।
अब प्रश्न यह उठता है कि अति प्राचीन युग में भारतीय-ध्वज का स्वरूप कैसा था ? ऋग्वेद में कहा गया है – *अदृश्रमस्य केतवो वि रश्मयो जनाँ अनु। भ्राजन्तो अग्नयो यथा।।* अथर्ववेद, 6.126.3 अर्थात्, उगनेवाली सूर्य की रश्मियां, तेजस्वी अग्नि की ज्वालाएं (फड़कने वाले) ध्वज के समान दिखाई दे रही हैं। इस मंत्र से यह निश्चित होता है कि वैदिक आर्यों के ध्वज का आकार अग्नि-ज्वाला के समान था।

वेदों में कई स्थानों पर अग्नि-ज्वाला के आकारवाले ध्वज का वर्ण भगवा स्पष्ट किया गया है
*”एता देवसेना: सूर्यकेतवः सचेतसः।*
*अमित्रान् नो जयतु स्वाहा ।।”*
(अथर्ववेद ५.२१.१२),
*”अरुणैः केतुभिः सह “*
(अथर्ववेद ११.१२.२)

उपरोक्त मन्त्रों में अरुण, अरुष, रुशत्, हरित, हरी, अग्नि, रजसो भानु, रजस् और सूर्य – ये नौ शब्द ध्वज का वर्ण निश्चित करते हैं।
हरित और हरी – इन शब्दों से हल्दी के समान पीला रंग ज्ञात होता है। सूर्य शब्द सूर्य का रंग बता रहा है। यह रंग भी हल्दी के समान ही है। अरुण रंग यह उषाकाल के सदृश कुल लाल रंग के आकाश का रंग है।
अरुष तथा रुशत् – ये शब्द भी भगवे रंग के ही निदर्शक हैं। रजस तथा रजसो भानु – ये शब्द सूर्य किरणों से चित्रित धूल का रंग बता रहे हैं। इन मन्त्रों में ध्वज को अग्नि ज्वाला, विद्युत, उगता हुआ सूर्य तथा चमकनेवाला खंग – ये उपमाएं दी हुई हैं।
इसमें निर्णायक उपमाएं रजसो भानुं तथा अरुण: – ये हैं। कहने की आवश्यकता नहीं कि इन पदों में निदर्शित रंग भगवा ही है।
इन नौ पदों से यद्यपि भगवे रंग की न्यूनाधिक छटाएं बताई गई हैं, तथापि पीला तथा लाल भरतमुनिकृत नाट्यशास्त्रम् में युद्ध में देवताओं द्वारा दानवों के पराजित होने पर इन्द्र के विजयोत्सव में मनाये गये ध्वज-महोत्सव का उल्लेख मिलता है।
सूर्यमण्डलान्तर्गत सूर्यस्वरूप सर्वरूप अप्रतिरूप शिव अपनी ध्वजा
और पताका पर सूर्यका चिह्न धारण करते हैं।

*नमोऽस्त्वप्रतिरूपाय विरूपाय शिवाय च।
सूर्याय सूर्यमालाय सूर्यध्वजपताकिने।।*
(महाभारत – शान्तिपर्व २८४.८१)
त्रिकोण रक्तवर्ण के वस्त्रपर अङ्कित श्वेत वर्ण के सूर्य को वैदिक ध्वज माना गया है

उपरोक्त मंत्रों से स्प्ष्ट है कि वैदिक सनातन ध्वज की संरचना में मुख्य उसका रंग है जो कि यज्ञ की पावन अग्नि , उगते हुए सूर्य और उत्साह एवं वीरता के प्रतीक भगवा है। इसके मध्य में श्वेत वर्णीय सूर्य है और सूर्य के मध्य सबका कल्याण हो ऐसी स्वस्ति कामना करता स्वस्तिक चिन्ह है।

आखिर सपना हुआ पूरा

*A Dream Finally Taking Shape!*

*When a 500-year dream finally takes shape, the result is breathtaking.*

*Shri Ram Lalla’s home has returned in full glory crowned by a rising saffron flag and centred around the 51-inch Balak Shri Ram Ji idol carved from a single Krishna Shila stone.*

*A 10-acre Panchvati, the Sapta Mandap honouring seven revered figures, and an 800-meter Shri Ramkatha mural wall add unmatched grandeur.*

*And on Shri Ram Navami, a 5.8 cm sunbeam will land exactly on Shri Ram Lalla’s forehead.*

मोदीजी का संदेश

*प्रभु श्री राम भारतवर्ष की आत्मा, उसकी चेतना और उसके गौरव का आधार हैं।*

*मेरे लिए यह परम सौभाग्य की बात है कि कल 25 नवंबर को सुबह करीब 10 बजे अयोध्या के दिव्य-भव्य श्री राम जन्मभूमि मंदिर परिसर में दर्शन-पूजन का अवसर प्राप्त होगा।*

*इसके बाद दोपहर लगभग 12 बजे श्री राम लला के पवित्र मंदिर के शिखर पर केसरिया ध्वज के विधिवत आरोहण के ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनूंगा।*

*यह ध्वज भगवान श्री राम के तेज, शौर्य और उनके आदर्शों के साथ-साथ हमारी आस्था, अध्यात्म और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।*

*जय श्री राम!* *जय जय श्रीराम *

*राम भारत की आस्था है,*
*राम भारत का आधार है,*
*राम भारत का विचार है,*
*राम भारत का विधान है,*
*राम भारत की चेतना है,*
*राम भारत का चिंतन है,*
*राम भारत की प्रतिष्ठा है,*
*राम व्यापक है, विश्व है, विश्वात्मा है…*

*– माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी*

 

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