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जहाजरानी उद्योग : शिप रीसाइक्लिंग में सुपरपॉवर भारत

*दुनिया में हर तीसरा जहाज भारत में होता है रीसाइकिल, 2030 का लक्ष्य समय से पहले पूरा*

* दुनिया का हर तीसरा जहाज अब भारत में रीसायकल होता है।*
● भारत विश्व का सबसे बड़ा शिप रीसाइक्लिंग देश बन चुका है।
● वैश्विक शिप रीसाइक्लिंग बाजार में भारत की हिस्सेदारी 35.4% तक पहुंच गई है।
● इसका अर्थ है कि दुनिया में कबाड़ होने वाले हर 3 जहाजों में से 1 जहाज भारत में रीसायकल किया जाता है।
● भारत ने Maritime India Vision 2030 का लक्ष्य 5 साल पहले ही हासिल कर लिया।
● गुजरात का अलंग-सोसिया शिप रीसाइक्लिंग यार्ड भारत की इस सफलता का प्रमुख केंद्र है।

*⚓ “आज दुनिया का हर तीसरा जहाज भारत में रीसायकल होता है — यह भारत की बढ़ती समुद्री शक्ति और औद्योगिक क्षमता का प्रमाण है।” *

* भारत बना दुनिया का नंबर-1 शिप रीसाइक्लिंग देश, अब वैश्विक बाजार में उसकी हिस्सेदारी 35.4% है।*

● दुनिया के हर 3 जहाजों में से 1 जहाज भारत में रीसाइकल किया जाता है।
● भारत ने Maritime India Vision 2030 का लक्ष्य 5 वर्ष पहले ही हासिल कर लिया।
● वैश्विक शिप रीसाइक्लिंग में भारत की हिस्सेदारी 2024 के 30.1% से बढ़कर 2025 में 35.4% हो गई।
● भारत में जहाज रीसाइक्लिंग 1.86 मिलियन GT (2024) से बढ़कर 2.99 मिलियन GT (2025) हो गई, यानी लगभग 60% की वृद्धि।
● यह उपलब्धि भारत को जिम्मेदार और टिकाऊ शिप रीसाइक्लिंग के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करती है।
● सरकार ने शिप रीसाइक्लिंग अधिनियम लागू कर उद्योग को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और पर्यावरण मानकों के अनुरूप बनाया।
● भारत ने 2019 में हांगकांग इंटरनेशनल कन्वेंशन को स्वीकार किया, जो सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल जहाज रीसाइक्लिंग के लिए वैश्विक संधि है।
● शिप रीसाइक्लिंग यार्डों के आधुनिकीकरण के लिए सरकार ने ₹53.5 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान की है।
● गुजरात का अलंग शिप रीसाइक्लिंग यार्ड भारत की इस सफलता का प्रमुख केंद्र है।
● भारत का लक्ष्य अलंग के विस्तार के माध्यम से अपनी शिप रीसाइक्लिंग क्षमता को लगभग दोगुना कर 9 मिलियन लाइट डिस्प्लेसमेंट टन (LDT) तक पहुंचाना है।

*अलंग शिप रीसाइक्लिंग यार्ड, गुजरात के भावनगर जिले में स्थित दुनिया का सबसे बड़ा जहाज तोड़ने और पुनर्चक्रण (re-cycling) केंद्र है। यहाँ पुराने जहाजों को सुरक्षित रूप से तोड़कर स्टील, फर्नीचर और मशीनरी जैसी उपयोगी सामग्रियों को फिर से उपयोग के लिए निकाला जाता है।*

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