संतों द्वारा राम मंदिर प्रकरण में महासचिव और कोषाध्यक्ष पर हमला
साधु संतों द्वारा ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद गिरि और महासचिव चंपत राय पर हमला क्यों?
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती में चोरी के प्रकरण में SIT की जाँच के बाद आवश्यक कार्यवाही कर सभी अपराधियों पर समुचित कार्यवाही हुई है और आगे बढ़ रही है। इसमें राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय जी से भी गहन पूछताछ हुई यद्यपि उन्हीं की सूझबूझ और गोपनीय कैमरे के कारण जाँच के तथ्य जुटाए जा सके और सभी सोने चांदी के आभूषणों को पूरे रिकॉर्ड के साथ सुरक्षित रख अपने कर्तव्य का पालन किया, फिर भी अन्य कर्मचारियों द्वारा की गई चोरी की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने त्याग पत्र भी दे दिया।
लेकिन चूंकि इस सारे मामले में राजनैतिक माहौल गर्मा गया है और इसका शोर विपक्षी दलों ने खासकर समाजवादी पार्टी ने ही किया इसलिए मुद्दे का सियासी पारा चढ़ जाना स्वाभाविक तो है, चोरी में शामिल प्रत्यक्ष अपराधी की सपा सुप्रीमो से सैकड़ों बार मोबाइल कॉल ने इस मामले में तिल का ताड़ और साजिश की संभावना से लोगों के कान खड़े हो गए।
परन्तु चूंकि विषय धार्मिक आस्था का है, इसलिए साधु संतों की भृकुटि तन जाना स्वाभाविक ही है किंतु उनका बिना पूरे तथ्यों के प्रतिक्रिया देने से हिन्दू धर्म और समाज की अधिक क्षति हो रही है।
इस श्रृंखला में इस प्रकरण में अब श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष और राष्ट्रीय संत स्वामी गोविंद गिरि पर भी आरोप लगाए जा रहे हैं। जगतगुरु परमहंस आचार्य ने कहा है कि ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष होने के नाते गोविंद गिरि को चढ़ावा चोरी की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि गोविंद गिरि अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते है।
वही अयोध्या स्थित हनुमान गढ़ी मंदिर के पुजारी डॉ. विदेशाचार्य महाराज ने कहा कि कोषाध्यक्ष होने के नाते गोविंद गिरी को चढ़ावा चोरी की जांच के दायरे में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय से पूछताछ हो सकती है तब जांच एजेंसियां गोविंद गिरि से पूछताछ क्यों नहीं कर रही।
अब तो चढ़ावा चोरी के प्रकरण में एफआईआर भी दर्ज हो गई है। मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गणना और फिर उसे सुरक्षित रखने की प्रमुख जिम्मेदारी कोषाध्यक्ष की ही है।
डॉ. विदेशाचार्य महाराज ने कहा कि इस बात का भी पता लगाया जाना चाहिए कि स्वामी गोविंद गिरी किन के पैसों से चार्टर प्लेन से भ्रमण करते हैं। उन्होंने स्वामी गोविंद गिरि की देश भर में संपत्तियों की भी जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि गोविंद गिरि अयोध में राम मंदिर में तभी नजर आते हैं, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आते हैं।
क्या ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष को मंदिर के चढ़ावे की निगरानी नहीं करनी चाहिए? जांच एजेंसियों ने जिस प्रकार महामंत्री चंपत राय से घंटों पूछताछ की है, उसी प्रकार गोविंद गिरि से भी की जानी चाहिए।
हमला करने से साधु संत तो बचे:
अयोध्या में मंदिर निर्माण में स्वामी गोविंद गिरि महाराज की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। गोविंद गिरि महाराज के सानिध्य में ही देश के विभिन्न शहरों में वेद विद्यालय संचालित है। इनमें पुष्कर का सावित्री विद्यापीठ भी शामिल हें। स्वामी गोविंद गिरी को सनातन धर्म का प्रतीक माना जाता है। हो सकता है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष के रूप में वे प्रभावी भूमिका न निभा सके हो, लेकिन कम से कम साधु संतों को तो गोविंद गिरि महाराज पर हमला करने से बचना चाहिए।
खुद गोविंद गिरि ने भी कहा है कि राम मंदिर के चढ़ावे की गणना और फिर बैंकों तक नगद राशि जमा करवाने में उनकी कोई भूमिका नहीं है। न ही कोषाध्यक्ष के तौर पर बैंक के किसी अकाउंट पर हस्ताक्षर हें। इतना ही नहीं उनके हस्ताक्षरों से बैंक से कोई राशि भी नहीं निकाली जाती। गोविंद गिरि ने माना कि चढ़ावा चोरी के प्रकरण से वह न केवल आहत है, बल्कि लज्जित भी है।
अखिलेश पहले मंदिर जाएं:
उत्तर प्रदेश में सपा के नेता और पूर्व सीएम अखिलेश यादव बार बार कह रहे है कि राम मंदिर के चढ़ावे के चोरी होने से हिंदुओं की आस्था को क्षति पहुंची है। हिंदुओं की आस्था की दुहाई देकर अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी आरोप लगा रहे हैं।
यह सही है कि चढ़ावा चोरी की खबरों से हिंदुओं की आस्था को धक्का लगा है, लेकिन सवाल उठता है कि अखिलेश यादव को हिंदुओं की आस्था की चिंता कब से हो गई? अखिलेश याव तो उन नेताओं में शामिल हैं जो अपने राजनीतिक स्वार्थों के खातिर अभी तक भी अयोध्या में राम मंदिर के दर्शन करने नहीं गए हैं।
जो व्यक्ति मंदिर जाने से डरता हो वो हिंदुओं की आस्था की चिंता कर रहा है। यदि अखिलेश यादव को हिंदुओं की आस्था की इतनी ही चिंता है तो पहले अयोध्या जाकर मंदिर में दर्शन तो करने चाहिए।
निश्चित ही अखिलेश यादव की भगवान राम में आस्था नहीं है परंतु हिंदुओं की आस्था के साथ साजिश का सूत्रधार बनकर अपनी राजनैतिक रोटियां सेंकने की आस्था अवश्य है।